गरीब सवर्ण

गरीब सवर्ण आरक्षण का भविष्य और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की दुर्गति

केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए, आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग या कहें गरीब सवर्ण को आरक्षण देने का प्रावधान कर दिया है। प्रावधान के मुताबिक सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण अब गरीब सवर्णों को भी दिया जायेगा। इस प्रावधान में कुछ शर्तें भी जोड़ी गई है, जिससे कि 10% आरक्षण का फायदा सिर्फ गरीब सवर्ण ही उठा सके।

कौन से गरीब सवर्ण होंगे 10% आरक्षण के पात्र

विधेयक के मुताबिक गरीब सवर्ण की श्रेणी में उन लोगों को रखा गया है, जिनकी आय 8 लाख से कम हो तथा उनके पास 5 एकड़ से जमीन कम हो। इन शर्तों को पूरा करने वाले सामान्य वर्ग के लोग गरीब सवर्ण माने जायेंगे और उन्हें उच्च शिक्षा तथा सरकारी नौकरियों में उचित अवसर प्राप्त होंगे।

मौजूदा आरक्षण व्यवस्था का क्या है हाल?

केंद्र की गरीब सवर्ण आरक्षण व्यवस्था से पहले देश में एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू है जिसकी स्थिति पहले ही बेहद ख़राब है। देश के अधिकतर सरकारी विभागों में सवर्ण वर्ग का 60 से लेकर 95 प्रतिशत तक पदों पर कब्ज़ा है।

हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस अखबार द्वारा आरटीआई द्वारा प्राप्त जानकारी को छापा था। जिसके मुताबिक भारत की सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में 95 परसेंट प्रोफेसर रिजर्व कोटे से बाहर से हैं। एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर ऐसे लोग 92 फीसदी हैं. कैबिनेट सेक्रेटारिएट, जहां से देश चलता है, वहां 80 परसेंट सामान्य वर्ग के अफसर हैं।

अगर अब इसमें 10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण जोड़ दिया जाये तो एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण व्यवस्था की जरूरत ही कहाँ पड़ेगी क्योंकि उनके लिए कोई पद सरकारी विभागों में बचेगा नहीं। गौरतलब हो कि देश में आरक्षण व्यवस्था कोई ग़रीबी हटाओ कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह देश के पीछे छूटे हुए वर्गों को मुख्यधारा में लाने की व्यवस्था है।


क्या हो सकता है ग़रीब सवर्ण आरक्षण व्यवस्था का भविष्य

देश में पहले से ही मौजूद एससी, एसटी और ओबीसी के लिए की गई आरक्षण व्यवस्था पूर्ण रूप से इतने सालों से अब तक लागू नहीं हो पाई है। ऐसे में गरीब सवर्ण आरक्षण व्यवस्था किसी गहरी साजिश की ओर इशारा करती है।

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हो सकता है आने वाले समय में सवर्ण आरक्षण व्यवस्था का विरोध हो और सरकार सवर्ण आरक्षण व्यवस्था को हटाने के बहाने बाकि आरक्षण व्यवस्था को भी ध्वस्त कर दे। जैसे कि समय – समय पर आरक्षण व्यवस्था पर सवर्ण वर्ग निशाना साधते हुए आया है लेकिन सरकार द्वारा 10 प्रतिशत गरीब सवर्ण आरक्षण लागू करने के बाद सारे विरोध शांत नजर आते है।

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