फिर हुए राष्ट्रपति

फिर हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपमानित अब जगन्‍नाथ मंदिर के सवको ने दिया धक्का

फिर हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपमानित अब जगन्‍नाथ मंदिर के सवको ने दिया धक्का: भारत देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक बार फिर दलित होने की वजह से अपमानित होना पड़ा। इस बार अपमान होने की सारी हदें पार हो गई। जगन्‍नाथ मंदिर के कुछ सेवकों ने राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए न सिर्फ धक्का दिया बल्कि कोहनी भी मारी।

इस घटना का खुलासा तब हुआ, जब मंदिर प्रसाशन ने दोषी सेवको के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया। एनबीटी की खबर के मुताबिक 18 मार्च को राष्ट्रपति तथा उनकी पत्नी जगन्‍नाथ मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे थे। मंदिर के गर्भ गृह में पूजा करने के जाते वक़्त, मंदिर के कुछ सेवक राष्ट्रपति के सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए उनके पास पहुंच गये। मंदिर सेवको ने कथित रूप से राष्ट्रपति को न सिर्फ धक्का दिया बल्कि कोहनी भी मारी।

वही घटना के बाद राष्ट्रपति भवन सेवको के इस अनुचित व्यवहार पर सिर्फ कड़ी आपत्ति जता रहा है। दूसरी तरफ मंदिर के मुख्य प्रसाशक और आईएएस अधिकारी प्रदिप्‍ता कुमार महापात्रा का कहना है कि मामले को ज्यादा तूल न दिया जाये और घटना का पूरा विवरण देने से मना कर दिया।

हालाँकि उन्होंने टाइम्‍स ऑफ इंडिया से राष्ट्रपति के साथ हुए दुर्व्यवहार की पुष्टि की है और बताया कि ‘ हमें राष्‍ट्रपति के कार्यालय से पत्र मिला है। हमने इस मामले पर मंदिर प्रबंधन समिति से विचार-विमर्श किया है। हम इस मामले की जांच कर रहे हैं। ‘

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खबरों के मुताबिक कथित रूप से राष्ट्रपति तथा उनकी पत्नी जब मंदिर के गर्भ गृह में पूजा करने के लिए जा रहे थे। तब मंदिर के कुछ सेवको ने उनका रास्ता ब्लॉक किया था। वही कुछ सेवको ने वहां पर उन्हें न सिर्फ धक्का दिया बल्कि कोहनी भी मारी थी।

गौरतलब हो की देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को मंदिर में पूजा करने के लिये दूसरी बार अपमानित होना पड़ा है। इससे पूर्व वह राजस्थान के पुष्कर मंदिर में अपमानित हुए थे और उन्हें मंदिर की सीढ़ियों पर पूजा करनी पड़ी थी।

हालाँकि इस खबर को सोशल मीडिया पर अफवाह बताया गया था। इसका खंडन करते हुए ब्रह्मा मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव और एसडीएम विष्णु गोयल ने कहा था कि ‘ सोशल मीडिया पर असमाजिक तत्वों द्वारा लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि राष्ट्रपति को दलित होने की वजह से मंदिर में प्रवेश करने नहीं दिया गया, जिसकी वजह से उन्हें सीढ़ियों पर पूजा करनी पड़ी थी।

जबकि ऐसा नहीं था, राष्ट्रपति की पत्नी सविता के पैरो में दर्द के कारण राष्ट्रपति मंदिर के अंदर नहीं गये थे और उन्होंने सीढ़ियों पर पूजा की।’

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गौरतलब हो की देश में दलितों के मंदिर में प्रवेश को लेकर समय – समय पर घटनायें सामने आती रही है। जिस देश में राष्ट्रपति को मंदिर में प्रवेश को लेकर धक्का खाना पड़े, उस देश में आम नागरिको की हालत क्या होगी। वही ऐसे मामलो पर सीधे कार्यवाही होने की बजाय नोटिस का खेल खेला जा रहा है।

क्या देश के किसी मंदिर में बैठा पुजारी ब्राह्मण या सेवक देश के कानून और संविधान से ऊपर है, जो देश के राष्ट्रपति तक को भी अपमानित कर सकता है। वो भी सिर्फ दलित होने की वजह से। भारतीय संविधान ने ऐसे मामलो से निपटने के लिये प्रसाशन के अधिकारियों को पूर्ण शक्ति दी है। लेकिन देश में कानून सिर्फ गरीबों, शोषित और वंचितों के लिये चलता है।

वही देश के कोने – कोने की खबर रखने वाला मीडिया राष्ट्रपति के साथ हुई इस घटना से अंजान है। क्या यह मुमकिन है ? कि देश के राष्ट्रपति के साथ हुई इस घटना से मीडिया अंजान है। या फिर किसी ख़ास समूह के दबाव में या उनके अनुसार काम करता है। सवाल कई उठाये जा सकते है और ये सवाल समय – समय पर उठते भी है। लेकिन कुछ लोगो को इन सवालों से कोई फर्क नहीं पड़ता उनको ऐसे सवालों की अब आदत हो चुकी है।

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Shambhu Paswan
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Shambhu Paswan

The dignity of high profile needs to be maintained as per protocol.

Avinash
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Avinash

Bohot accha kiya dhaka deke 2 4 late bhi marna tha..

SUHEL AHMAD
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SUHEL AHMAD

जब देश के दलित राष्टपति के साथ यह हाल है तो सोचा है कभी गरीब दलितों के साथ कैसा व्यवहार होगा?

Rathod
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Rathod

kalam -354(A):- Jatiy shatamni Badal shikxa