मोदी सरकार का सीबीआई

मोदी सरकार का सीबीआई बनाम सीबीआई मामले में दखल और मनमानी

देश के इतिहास में पहली बार भ्रष्टाचार को लेकर सीबीआई की अंदरूनी रार खुलकर सामने आयी है। अभी तक इस संस्थान को पिंजरे का तोता और भी न जाने क्या – क्या कहकर लोग सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाते नजर आते थे लेकिन मोदी सरकार का सीबीआई बनाम सीबीआई के इस मामले में सरकार के हस्तक्षेप को देखकर लोगों की भौंहे चढ़ी नजर आ रही है।

वहीं विपक्ष भी सरकार को सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का पक्षपात करने को लेकर तरह – तरह का आरोप लगा रहा है।

क्या है मामला ‘सीबीआई बनाम सीबीआई’ ?

सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना पर आरोप है कि उन्होंने बिचौलिये व्यापारी मनोज प्रसाद के जरिये मीट कारोबारी मोईन कुरैशी का केस हल्का करने और जांच में सामने आये सतीश साना का मामला ख़त्म कराने के लिए 5 करोड़ की रिश्वत मांगी। जिसमे से अस्थाना ने एडवांस के तौर पर बिचौलिये व्यापारी मनोज प्रसाद के जरिये 3 करोड़ रूपए भी लिए।

ख़बरों के मुताबिक सतीश साना ने सीबीआई में चल रहे अपने मामले को ख़त्म कराने के लिए दुबई के व्यापारी व बिचौलिये मनोज प्रसाद व उसके भाई सोमेश प्रसाद से मुलाकात की।

मनोज प्रसाद ने साना को विश्वास दिलाया कि सीबीआई के एक अधिकारी की मदद से उनका केस ख़त्म करा देंगे लेकिन इसके बदले उन्हें 5 करोड़ रूपए देने होंगे। सतीश साना ने सीबीआई के उस अधिकारी से व्हाट्सप्प पर बात की जो कोई और नहीं बल्कि सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ही थे।

जिन्होंने साना को उनका केस ख़त्म कराने का आश्वासन दिया। साना ने एडवांस के तौर पर अस्थाना को 3 करोड़ रूपए दिए। लेकिन सीबीआई के नोटिस व मानसिक प्रताड़ना बंद न होने पर सतीश साना ने सीबीआई में मामला दर्ज कराया।

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साना द्वारा दी गई सीबीआई को एफआईआर में अस्थाना की व्हाट्सप्प चैट तथा ट्रांजैक्शन की रकम को आधार बनाया गया। एफआईर में सीबीआई विशेष निदेशक राकेश अस्थाना, सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार, मनोज प्रसाद, सोमेश प्रसाद तथा अन्य को अभियुक्त बनाया गया।

साना की एफआईर पर कार्यवाही करते हुए सीबीआई ने पहली बार अपने दफ्तर पर ही छापा मारा। सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया जबकि अस्थाना को गिरफ्तार नहीं किया गया।

अस्थाना ने अपने ऊपर हुई कार्यवाही से बौखलाकर सीवीसी को टॉप सीक्रेट पत्र लिखा और पत्र में आरोप लगाया कि सीबीआई के निदेशक अलोक वर्मा ने सतीश साना का मामला निपटाने के लिए 2 करोड़ की रिश्वत ली है। हालांकि सीबीआई राकेश अस्थाना के सभी आरोपों को नकार देती है।

मोदी सरकार का सीबीआई बनाम सीबीआई मामले में एंट्री

सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के पत्र लिखने के बाद सीवीसी और मोदी सरकार हरकत में आती है और दोनों सीबीआई के अफसरों को छुट्टी पर भेज देती है। मीडिया तथा सरकार अस्थाना के रिश्वत खोरी मामले को सीबीआई के दो बड़े अफसरों के बीच की रार बताती है।

मामले में समझने वाली बात यह है कि जब सीबीआई ने साना की शिकायत के आधार पर सीबीआई के डीएसपी दवेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया, तो उसी शिकायत के आधार पर अस्थाना पर सीबीआई की कार्यवाही, सीवीसी और मोदी सरकार को मंजूर क्यों नहीं?

आलोक वर्मा पहुंचे सुप्रीमकोर्ट

सीबीआई निदेशक अलोक वर्मा को सरकार द्वारा जबरदस्ती छुट्टी पर भेजे जाने तथा उनकी जगह वरिष्‍ठ आईपीएस अधिकारी एम नागेश्‍वर राव को अंतरिम निदेशक नियुक्‍त करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

अलोक वर्मा द्वारा कोर्ट में दी गई याचिका के मुताबिक वर्मा ने आरोप लगाया है कि सरकार सीबीआई के काम में दखल दे रही है और अपनी मनमानी कर उन्हें जबरदस्ती छुट्टी पर भेज रही है जो कि डीएसपीई एक्ट के 4-b के खिलाफ है।

सेक्शन 4 b(2) के तहत सीबीआई के निदेशक को ट्रांसफर या छुट्टी पर भेजने के लिए ‘प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI की कमेटी’ की मंजूरी लेनी होती है लेकिन सरकार इसका उल्लंघन कर रही है। वर्मा की याचिका पर फिलहाल सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है तथा मामले की सुनवाई 26 अक्टूबर को शुरू होगी।

NS Team

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