गुजरात में हो रहे उत्तर भारतीयों पर हमले के लिए कौन जिम्मेदार?

गुजरात में
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गुजरात में इस वक़्त उत्तर भारतीयों के लिए डर का माहौल बना हुआ है। उन्हें नहीं पता कि कब उनको हिंदी भाषी होने की वजह से निशाना बना दिया जाए इसलिए पिछले कुछ दिनों से गुजरात से उत्तर भारतीय मजदूर पलायन करने पर मजबूर है।

गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हमले की शुरुआत, बिहार के एक व्यक्ति रविंद्र साहू द्वारा 14 माह की बच्ची से बलात्कार करने की घटना बाद हुई। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पीड़ित बच्ची ठाकुर समुदाय से थी। जिसके बाद कथित रूप से ठाकुर सेना व ठाकुर समुदाय से जुड़े लोगों ने उत्तर भारतीयों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

हिंदी भाषा बोलने वाले उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश व बिहार के मजदूर और कर्मचारियों को निशाना बनाये जाने लगा। पूरे घटनाक्रम का ठीकरा कांग्रेस के विधायक व ठाकुर सेना के अध्यक्ष अल्पेश ठाकुर के ऊपर फोड़ दिया गया है। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है, यह पता लगना अभी बाकि है।

अल्पेश ठाकुर ने मामले पर कहा था कि ‘जो भी इस घटनाक्रम के पीछे है, मैं उन सभी से शांति की अपील करता हूँ। मामले में सेना (ठाकुर सेना) या हमारे समुदाय का सदस्य हो सकता है लेकिन इस तरह के निर्देश किसी को नहीं दिए गए है। यह सिर्फ हमको और हमारी सेना को बदनाम करने की साजिश है।

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हमारा लक्ष्य सिर्फ शांति और राज्य में रोजगार से है। साथ ही अल्पेश ने कहा कि उनका निशाना राज्य सरकार और और कंपनियां है, न कि कोई व्यक्ति विशेष, समुदाय और जाति है। कंपनियों में स्थानीय लोगों के 80 प्रतिशत रखने के नियम को भी कंपनियां नहीं मानती है।

राज्य सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि यह पूरे तरीके से लागू हो।’ वही अल्पेश ठाकुर ने आज एएनआई से पलायन को लेकर कहा कि छठ पूजा के आने की वजह से उत्तर भारतीय वापस अपने राज्य जा रहे है।

सवाल यह है कि इस पूरे मामले के लिए आखिर किसको जिम्मेदार माना जाये, राज्य सरकार को जिसकी जिम्मेदारी राज्य में लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। या फिर उसे जिसके समुदाय या संगठन पर लोगों के ऊपर हमला करने का आरोप लग रहा है।

सबसे हैरानं करने वाली बात यह है कि जिस राज्य से देश के पीएम है व उन्ही की पार्टी की राज्य में सरकार है, यहाँ तक उनकी पार्टी उसी राज्य में देश की एकता के प्रतीक रहे सरदार वल्लभ भाई पटेल की याद में विशाल मूर्ती का निर्माण करा रही है।

जिसको देश की एकता के रूप में दर्शाया जा रहा है। उस राज्य में ही क्षेत्रीय आधार पर लोगों निशाना बनाया जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी मामले पर शायद मौन निद्रा में है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ नीतीश बाबू ही चुप है कई और भी राजनीति के सक्रिय मजदूर मसीहा भी कहीं गुमनाम है जो सही मौके की अभी तक सिर्फ तलाश में है।

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