झूठे देश द्रोही

झूठे देश द्रोही नारे लगने पर मीडिया चीखती है लेकिन संविधान जलने पर मौन क्यों है?

देश में मीडिया बहुत बड़ा देशभक्त है। देशभक्ति के मामले में इसकी जितनी तारीफ की जाये उतनी ही कम है। अगर देश में कहीं भी किसी ने देश के खिलाफ झूठे देश द्रोही नारे की अगर अफवाह भी उड़ा दी तो ये न्यूज़ स्टूडियों में बैठकर सामने वाले कथित देशद्रोही की धज्जियाँ उड़ा कर रख देंगे लेकिन वो देशद्रोही सत्ता पक्ष का विरोधी या ख़ास समुदाय से होना चाहिए।

देश विरोधी नारे लगने पर दिल्ली पुलिस भी बड़ी सक्रिय दिखती है लेकिन जंतर – मंतर पर संविधान की प्रति जलने के बाद ऐसा लगता है कि कौमा में चली गई है। देश की राजधानी दिल्ली में स्थित संसद भवन जिसे कुछ लोग लोकतंत्र का मंदिर भी मानते है।

बीते गुरूवार को उसी संसद मार्ग पर दो अलग-अलग संस्थाएं यूथ फॉर इक्वैलिटी फाउंडेशन (आजाद सेना) और आरक्षण विरोधी पार्टी ने संयुक्त रूप से एससी – एसटी एक्ट के विरोध में बड़ी शान से देश के संविधान की प्रतियां जलाई और संविधान निर्माता डॉ अंबेडकर मुर्दाबाद के नारे लगाये।

किसी कानून के विरोध करने के तरीके कई प्रकार के हो सकते है। लेकिन जिस देश में जो रह रहा है उसी देश के संविधान की प्रतियां जलाकर ये कैसा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। संविधान की प्रतियां जलाने का वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और लोगों का गुस्सा दिखने लगा तब जाकर पुलिस हरकत में आती है।

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जिस देश के संविधान का पालन करने की कसम खाने वाली पुलिस उसे जलाने वालों के प्रति इतनी लाचार क्यों नजर आती है? कानून के जानकारों मानें तो संविधान जलाने की वजह से तीन साल जेल में बिताने पड़ सकते है। वहीं मीडिया भी इस मामले पर चुप्पी साढ़े हुए है।

यह चुप्पी सिर्फ एक ही वजह से हो सकती है क्योंकि संविधान जलाने वाले लोग किसी विशेष जाति, धर्म या विपक्षी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़े हुए थे। वरना अब तक अपना सूरमा भोपाली मीडिया टीवी स्टूडियो में धज्जियां उदा कर रख देता।

NS Team

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