देश का चौकीदार

देश का चौकीदार बनने का नाटक या चुनावी नौटंकी

देश का चौकीदार: चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक पार्टियों का ढोंग जोरों पर होता है। कोई देश भक्त बनता है, कोई धार्मिक नेता बनता है, कोई समाज सुधारक तो कोई चौकीदार। देश में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर इस तरह की नौटंकी अभी जोरों पर चल रही है।

भारतीय जनता पार्टी और उसके नेता इस वक़्त खुद को चौकीदार बता रहे है। अगर आपको मालूम नहीं हो तो बता दूँ कि देश में खुद को चौकीदार कहलवाने की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। जो खुद को देश का प्रधानमंत्री न कहलवाकर देश का चौकीदार कहलवाना ज्यादा पसंद करते है।

वो बात अलग है कि पीएम मोदी के देश के चौकीदार रहते हुए कई उद्योगपति देश के कई बैंको का करोड़ों रुपया लेकर विदेश चंपत हो गए। जिनको वापस देश में लाने की कोई भी पहल ठीक तरह से नहीं की गई है। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट पर अगर यक़ीन किया जाए तो भगोड़े नीरव मोदी को वापस लाने में सरकार कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही।

यूके की सरकार ने नीरव मोदी को लेकर भारत सरकार को तीन पत्र लिखे जिसका भारत सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं गया है। वही भारत सरकार देश की मीडिया को यह बता रही है कि नीरव मोदी को वापस लाने के सरकार पूरी कोशिश कर रही है।

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खैर ये छोड़िये, देश का रक्षा मंत्रालय जिसके ऊपर पूरे देश की सुरक्षा का भार होता है, उस रक्षा मंत्रालय से राफेल लड़ाकू विमान डील के जरूरी कागज़ ही चोरी हो जाते है। जो अपने आप में एक शर्मनाक घटना है। आखिर देश में किस तरह की चौकीदारी की जा रही है, जहाँ रक्षा मंत्रालय से टॉप सीक्रेट डॉक्यूमेंट ही चोरी हो रहे है।

क्या यही तरीका होता है देश की चौकीदारी करने का? जहाँ उद्योगपति देश की जनता का पैसा लेकर विदेशों में मौज करें और चौकीदार सोता रहे। इससे अच्छी चौकीदारी तो किसी बंगले के बाहर तैनात प्राइवेट सुरक्षा गार्ड कर लेता है जिसकी बिना मर्जी के कोई भी अंजान शख्स बंगले में प्रवेश नहीं कर सकता।

देश को सही तरीके से चलाने के लिए किसी चौकीदार की जगह कुशल नेतृत्व करने वाले इंसान की जरूरत है जो चौकीदारी का काम छोड़कर देश का नेतृत्व कर सके।

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