पटेल का चीन द्वारा निर्मित स्टेचू और सोशल मीडिया से गायब हुआ दिवाली पर चीन का बहिष्कार

पटेल
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पटेल का चीन द्वारा निर्मित स्टेचू: साल 2018 पिछले कई सालों में से पहला ऐसा साल होगा, जब सोशल मीडिया पर दीपावली के त्यौहार के दौरान चीन द्वारा निर्मित उत्पादों का बहिष्कार नहीं किया जा रहा हो।

साल 2017 की ही अगर बात की जाये तो कई संगठन (जो खुद को सामाजिक संगठन कहते है लेकिन वास्तव में उनका कार्य सरकार या राजनीतिक पार्टियों के लिए माहौल तैयार करना होता है।) ने खुलकर चीन उत्पादों के बहिष्कार का समर्थन किया था।

अगर ख़बरों पर यकीन किया जाये तो चीन के उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम में सबसे ज्यादा भूमिका आरएसएस से संबंधित संगठनों की थी। जो सोशल मीडिया तथा आम लोगों के बीच जाकर, लोगों से दिवाली पर चीन के निर्मित उत्पादों को न खरीदने की अपील करते नजर आ रहे थे, साथ ही साथ इससे देश को होने वाले फायदों को भी गिनाते नजर आ रहे थे।

इस मुहिम में शामिल कुछ तो ऐसे भी थे जो अपनी बात कटने पर सामने बैठे व्यक्ति को देशद्रोही तक कह देते थे। वहीं अगर इस मुहिम में राजनैतिक पार्टियों की बात की जाये तो बीजेपी और आम आदमी पार्टी इसको जोर – शोर से सपोर्ट करते नजर आये थे। सवाल यह उठता है कि आखिर इन कथित देश भक्तों को इस दिवाली पर कौन सा सांप सूंघ गया है?

इसके जवाब के लिए देश में चीन द्वारा निर्मित सरदार पटेल के स्टेचू की तरफ ध्यान देना होगा, जिसके बाद सारी कहानी समझ में आने लगेगी। करीब 3000 करोड़ की लागत से निर्मित सरदार पटेल का स्टेचू चीन द्वारा निर्मित ही है, जिसका अनावरण पीएम मोदी आज 31 अक्टूबर को करेंगे।

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राजनैतिक पार्टियों की सोशल मीडिया आर्मी आज सरदार पटेल की चीन निर्मित जिस मूर्ती का गुणगान करते दिखेंगे, वो ही आपको पिछले साल और आने वाले साल, 50 रुपये की चीन की निर्मित घरों की सजावट करने वाली लाइट का विरोध करते दिखेंगे।

क्या ऐसे लोगों से देशभक्ति की प्रेरणा ली जा सकती है? जो राजनैतिक पार्टियों के इशारे पर कठपुतली की तरह नाचते हो। सबसे मुश्किल की बात तो इस देश के लिए यह है कि ऐसे फर्जी या कथित देशभक्तों की संख्या बहुत ज्यादा है। जो बहुत बड़े समूह में काम करते है। अगर आम लोग इनकी बातों का सोशल मीडिया या कहीं भी विरोध करते है तो इनकी पूरी फ़ौज उन पर टूट पड़ती है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि सरदार पटेल की मूर्ती या सरदार पटेल का सम्मान नहीं करना चाहिए लेकिन सरदार पटेल को सम्मान देने के कई और भी तरीके हो सकते थे। क्या सरदार पटेल की मूर्ती बनाने में भारतीय इंजीनियर समर्थ नहीं थे? ऐसे कई सवाल उठाये जा सकते है लेकिन इनके जवाब कहीं नहीं मिलेंगे।

समय रहते इनसे सावधान रहना ही बेहतर विकल्प है। माना की इन कथित देशभक्तों की बातें शुरुआत में आपको मीठी लगती है लेकिन, जब वही बात इनकी पार्टी या संगठन से संबंधित होती है तो ये देश की जगह सिर्फ पार्टी को ही चुनते है। इसलिए खुद तय करें की देश बड़ा या पार्टी।

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