पूर्व राष्ट्रपति

पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार के सदस्यों के नाम असम एनआरसी लिस्ट में गायब

असम एनआरसी लिस्ट में पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार के सदस्यों के नाम गायब मिले। ज़िआउद्दीन अली अहमद पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के भाई स्वर्गीय इकरामुद्दीन अली अहमद के बेटे है।

जिनका नाम कल जारी हुई असम एनआरसी की आखिरी लिस्ट में भी शामिल नहीं था। न्यूज़ 18 के मुताबिक ज़िआउद्दीन अली ने इस पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि वह आवश्यक दस्तावेजों को खोजने का प्रयास करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके परिवार का नाम एनआरसी लिस्ट में शामिल हो। मेरे पिता का नाम विरासत डेटा में नहीं है। हम इसके बारे में थोड़ा चिंतित हैं।’

ज़िआउद्दीन तथा उनका परिवार असम के कामरूप जिले के रंगिया शहर से है। कल सोमवार को असम एनआरसी ड्राफ्ट की आखिरी लिस्ट सार्जनिक की गई।

लिस्ट के मुताबिक असम में करीब 40 लाख लोग बांग्लादेशी घुसपैठिये है जो भारत में अवैध रूप से रह रहे है। वहीं इस लिस्ट के सार्वजानिक होने के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है।

ममता बनर्जी का केंद्र सरकार पर हमला

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि लिस्ट में लोगों के सरनेम को आधार बनाकर शामिल किया गया है। उन्होंने आज भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि ‘ असम में क्या हो रहा है? एनआरसी समस्या, ये सिर्फ बंगालियों के लिए नहीं है।

ये अल्पसंख्यक है, ये हिंदू है, बंगाली है, बिहारी है। कल 40 लाख से अधिक लोगों ने शासित पार्टी को वोट दिया और आज अचानक ही उन्हें उनके देश में शरणार्थी बना दिया गया।

मैं अपनी मातृभूमि को आशाओं में नहीं देखना चाहती, मैं अपनी मातृभूमि को विभाजित होते नहीं देखना चाहती। हम बंगाल में ऐसा होने की अनुमति नहीं देंगे क्योंकि हम वहां हैं।

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आज ये लोग मतदान भी नहीं कर सकते हैं। इसके आलावा उन्होंने असम एनआरसी लिस्ट में पूर्व राष्ट्रपति के परिवार के सदस्यों के नाम गायब होने पर हमला करते हुए कहा कि मुझे आश्चर्य है कि हमारे पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार के सदस्य असम एनआरसी सूची में नहीं हैं।

इसके अलावा मैं क्या कह सकती हूँ? ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिनके नाम वहां नहीं हैं। अगर बंगाली कहें कि बिहारी बंगाल में नहीं रह सकते, दक्षिण भारतीय कहें कि उत्तरी भारतीय यहाँ नहीं सकते और उत्तरी भारतीय कहें कि दक्षिण भारतीय यहाँ नहीं रह सकते। क्या हालत होगी इस देश की।

हमारा देश एक घर है। केवल चुनाव जीतने के लिए लोगों को मोहरा नहीं बनाया जा सकता। क्या आपको नहीं लगता कि जिन लोगों का नाम उस सूची में नहीं हैं, वो लोग अपनी पहचान का एक हिस्सा खो देंगे? कृपया ये समझें कि भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश विभाजन से पहले एक थे।

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जो भी मार्च 1971 तक बांग्लादेश से भारत आया था वह भारतीय नागरिक है। गौरतलब हो कि कल असम एनआरसी ड्राफ्ट की अंतिम लिस्ट जारी की गई। जिसके बाद असम राज्य में लोगों की भारी भीड़ एनआरसी सेंटर्स पर उमड़ पड़ी।

करीब 40 लाख लोग अपना नाम उस लिस्ट में नहीं पा सके। वहीं सरकार का कहना है कि जिन लोगों के नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं है उनको असम राज्य का निवासी होने का पूरा मौका दिया जायेगा।

NS Team

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