मोदी सरकार का लोकतंत्र

मोदी सरकार का लोकतंत्र और हार्दिक पटेल का अनशन

मोदी सरकार का लोकतंत्र और हार्दिक पटेल का अनशन: भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में शांतिपूर्वक विरोध करने का हक़ देश के सभी नागरिकों का है। अब चाहे वो, अन्ना हजारे हो या हार्दिक या फिर कोई और। गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, गुजरात मे किसानों की समस्याओं को लेकर अनशन कर रहे थे।

हार्दिक पटेल की तबियत बिगड़ने पर प्रशासन ने जबरन अस्पताल में भर्ती करवा दिया है। 16 दिन से अन्न जल त्यागे हार्दिक को आइसीयू में रखा गया, तब जाकर उसकी हालत में सुधार आया।

साल 2014 से पहले का एक समय ऐसा भी था जब अन्ना हजारे अनशन पर बैठे थे। कुल 12 दिनों के अनशन में सरकार झुक गई और अन्ना की मांगों को मानने को लेकर राजी हुई।

देश का मीडिया जो अपने कुकर्मों की वजह से दुनिया के मीडिया के मुकाबले 172 वे पायदान पर है, उसने भी अन्ना के अनशन हर खबर लाइव दिखाई। लेकिन 25 वर्ष के युवा हार्दिक पटेल, जो 16 दिन तक गुजरात के किसानों की मांगों को लेकर अनशन पर बैठा रहा उसको एक भी दिन लाइव कवरेज मिला क्या?

यहां तक की गुजरात सरकार की तरफ से हार्दिक की मांगों को लेकर कोई पैरोकारी नहीं की गई। अगर हार्दिक पटेल की माने तो गुजरात भाजपा सरकार के मंत्री सौरभ पटेल ने तो कुछ अलग ही अंदाज दिखाया और कहा कि ‘ हार्दिक पटेल को प्यार से समझाएँगे नहीं समझेंगे तो राजकीय तरीक़े से समझाएँगे। ‘

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साल 2014 से पहले जो पार्टी लोकतंत्र को लेकर दुहाई देती रहती थी। खाद्य पदार्थो व पेट्रोल – डीज़ल के दाम बढ़ने पर उस पार्टी के कार्यकर्ता कपडे उतारकर प्रदर्शन करते थे तथा महिला कार्यकर्ता गले में सब्जियों की माला टांगकर प्रदर्शन करती थी, आज वही लोग मंहगाई और लोकतंत्र को भूल गए।

माना विकास अंधा है लेकिन गूंगा, बहरा तो नहीं है। अगर है तो ये देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बुरी खबर है। जिस पर गौर करने की बेहद ही जरूरत है।

NS Team

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